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यदुवंशी राजपूत बनने से पहले भाटी जाति की वंशावली

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हम सभी जानते हैं भाटी राजपूत राजपूतों की एक जाति है । जिनके राजवंश की उत्पत्ति यदुवंशी अहीर जनजाति से हुई है, परन्तु फिर भी भाटी राजपूत अपने आपको अहीर नहीं मानते । इनका मूल कारण है कि यदुवंशी राजपूत बनने से पहले वे यहूदी, पठानों आदि जनजातियों में रहते थे। यहूदियों में रहने के कारण वे याहुद्दय शब्द से यादव को सुरक्षित तो रख पाए। परन्तु यादवों के मूल जनजातीय रूप अहीर को खो दिए । जब माउंट आबू पर हिंदू बनाने के लिए यज्ञ किया गया था। उसमें ऋषियों ने इन्हें यादव बना दिया। विदित हो सबसे ज्यादा ख़ुद को अहीर ना मानने वाले यदुवंशी इसी क्षेत्र ( माउंट आबू के आस पास) में रहते हैं । इनका अहीर ना मानने का मूल कारण ही यही है कि उनके पूर्वज बहुत समय तक बंजारे लोगों के साथ बिताए हैं जिससे वे लोग शिक्षा से एक लम्बे दीर्घ काल तक दूर रहें। विदित हो कि यहूदी / हिब्रू भी मूलतः यादव ही होते हैं। यहूदी शब्द यादव तथा Hebrew शब्द अभीर / अभीरू से ही है

परंतु उनका पौराणिक यदु और भगवान कृष्ण से कोई संबंध नहीं है। विदित हो कि वे अफगानिस्तान में लंबे समय तक बंजारे समूहों में रहें थे। इसके लिए वे एक झूठी कहानी फैलाते हैं। जिसमें वे वज्र नाभ के द्वारिका से अफगानिस्तान जाने कि बात करते हैं जो झूठ है।

आभीर/ अहीर क्या होता है?

अत्रि गोत्र से संबंधित सभी लोगों का मूल सम्बन्ध अभीर जनजाति से ही है। पौराणिक दृष्टि से अत्रि गोत्र के लोग अभीर / अहीर हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से मूल अभीर जनजाति के लोगों को ही पुराणों में अत्रि गोत्र में समाहित किया गया है। दूसरे शब्दों में सभी सोमवंशी आभीर जनजाति से संबद्ध हैं। अर्थात यादव, पौरव, नागवंशी, यवन, मलेक्षा और आनव सभी मूलतः अहीर ही हैं। अहीर / अभीर शब्द आर्य के समतुल्य ही अर्थ रखता है जिसका अर्थ वीर या शक्तिशाली ही होता है। जैसे अहीर को गुजराती में आयर ओर दक्षिण भारत में अय्यर ।

Important:अत्रि गोत्र के ही नागवंशी ही अहीर होने का दावा करते हैं, कश्यप या अन्य गोत्र के नाग खुद को अहीर से नहीं जोड़ते!

अहीर शब्द का विश्लेषण भाई योगेश कुमार रोहि जी द्वारा भी किया गया है।

विदित हो प्रत्येक यादव अहीर होता है, परन्तु प्रत्येक अहीर यादव नहीं होता। परन्तु जो अहीर ना हो कर शब्द स्वयं को यादव कहता हो, निश्चित ही उनके पूर्वज यहूदी बंजारे समूहों में रहते थेे|

परन्तु कुछ लोग कहेंगे की केवल यादव ही अहीर होते हैं अवेस्ता में राजा ययाति को भी अवीर / अभीर बोला गया है वे तो यदु के पिता थे । यदुवंशी तो थे नहीं। मत्स्य पुराण / हरिवंश पुराण में बार बार ययाति के चरित्र विशेषण के रूप में आभीर शब्द का प्रयोग किया गया है।

पुरुरवा केे भी चरित्र विशेषण के रुप में अभीर शब्द का उच्चारण पुराणों में बार बार किया गया है।

विदित हो कभी इक्ष्वाकु वंश के किसी भी राजा के लिए अभीर शब्द पुराणों में विशेषण के रूप में भी नहीं प्रयोग किया गया है।

ब्राह्मणों में भी अहीर होते हैं!

“Garg distinguishes a Brahmin community who use the Abhira name and are found in the present-day states of Maharashtra and Gujarat. That usage, he says, is because that division of Brahmins were priests to the ancient Abhira tribe.” from wikipedia तो क्या ब्राह्मण यादव जाति से संबद्ध हैं? हो भी सकते हैं और नहीं भी | क्यों कि अत्रि गोत्र से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति अहीर / अभीर ही है। कौरव, पांडव, कृष्ण आदि सभी अहीर थे किन्तु कृष्ण अहीर के साथ यादव भी थे क्योंकी वे यदु के वंशज थे। परन्तु कौरव पांडव अहीर होने के साथ पौरव भी थे क्योंकि वे पुरू के वंशज थे।

Wikipedia का यादव पेज

Wikipedia का यादव पेज पर यही लिखा गया है कि अहीर/ आभीर से यादव उत्पन्न हुए हैं परन्तु लोग पढ़कर समझ ही नहीं पाते| अहीर एक खनिज है जिससे यादव, पौरव, नागवंशी, यवन, मलेक्षा, आनव आदि तत्वों का जन्म हुआ है।

भाटी राजपूत यदुवंशी राजपूतों की वास्तविक वंशावली

भाटी राजपूत यदुवंशी राजपूतों की वास्तविक वंशावली

Source: https://www.scribd.com/doc/247235327/Manj-and-Bhatti-Rajputs-Family-Tree

विदित हो कि हिन्दू से ज्यादा भाटी समुदाय के लोग मुसलमान हैं।

सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन के लिए अहीर शब्द का उपयोग पद्मपुराण में

सम्राट सहस्त्रबाहु अर्जुन के लिए अहीर शब्द का उपयोग

सहस्त्रबाहु को अहीर कहा जाना इस श्लोक के प्रभाव को कम कर देता । आहुक वंशात समुद्भूता आभीरा इति प्रकीर्तिता। (शक्ति संगम तंत्र, पृष्ठ 164) जिसमें ये कहा जा रहा कि अहुक के वंशज अहीर हुए। जबकि कार्तवीर्यार्जुन आहुक के पूर्वज थे।

भागवत में भी वसुदेव ने आभीर पति नन्द को अपना भाई कहकर संबोधित किया है व श्रीक़ृष्ण ने नन्द को मथुरा से विदा करते समय गोकुलवासियों को संदेश देते हुये उपनन्द, वृषभान आदि अहीरों को अपना सजातीय कह कर संबोधित किया है।

ऐसा हो सकता है यादव, पौरव, नागवंशी, यवन, मलेक्षा, आनव अहिरो में यादव सबसे अधिक शिक्षित रहें हों जिससे वे अपनी प्राचीन विरासतों को सहेजने में सफल रहे। संभवतः इनका माध्यम गीत रहें होंगे क्योंकी यादव अपने पूर्वजों की चरित्र को बिरहा आदि गीतों में अधिकतर गाते रहते हैं जो इनके इतिहास सहेजने का एक जरिया/ माध्यम रहा हो। आज यदुवंश के अलावा अहीर शब्द का विरासत नागवंशी लोगो के पास है जो अत्रि गोत्र से ही संबंधित राजा नहुष के पुत्रों के वंशज ही है पुराणों में एक कथा है जिसमें नहुष ऋषियों के श्राप से सर्प हो जाते हैं और वहां से नागवंशी अहिरो की उत्पत्ति होती है।

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